कांकेर में क्रिसमस से पहले चर्च लीडर ने अपनाया हिंदू धर्म, कहा- शव दफनाने को लेकर सुनियोजित था बवाल

= भीम आर्मी और आम आदमी पार्टी के लोगों की मदद से भड़काई गई हिंसा =
= बड़े तेवड़ा की घटना पर महेंद्र बघेल का खुलासा =
= शीतला मंदिर पहुंचकर सनातन धर्म में वापसी की महेंद्र बघेल ने =

-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग में कन्वर्टेड लोगों की मूल धर्म में वापसी से बौखलाए लोग अब सामाजिक संगठनों और राजनैतिक दलों की मदद से अराजकता फैलाने में लग गए हैं। ऐसा विस्फोटक खुलासा स्वयं एक चर्च लीडर ने किया है। सनातन धर्म में वापसी करते हुए इस चर्च लीडर ने कहा है कि कांकेर जिले के अंतागढ़ क्षेत्र के बड़े तेवड़ा गांव में हाल ही में शव दफनाने को लेकर दो समुदायों के बीच हुआ विवाद पूर्व प्रायोजित था। हमले के लिए संभाग के दूसरे जिलों से भी भीम आर्मी और आम आदमी पार्टी के लोगों को बुलाया गया था। इन्ही लोगों ने हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया है।
बड़े तेवड़ा में मतांतरित व्यक्ति के शव दफनाने को लेकर विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ा कि गांव में जमकर हिंसा हो गई।जिसके बाद हालात काबू से बाहर हो गए थे। हालात को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल फोर्स भेजा, जिसके बाद यहां कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई थी। लेकिन इस बीच क्रिसमस से पहले कांकेर से एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल चर्च लीडर महेंद्र बघेल ने घर वापसी की है। इतना ही नहीं महेंद्र बघेल ने ईसाई समुदाय पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि कांकेर में जो घटना हुई है वो सुनियोजित थी। गैर आदिवासी तबके के लोगों ने नारायणपुर, कोंडागांव, कांकेर से भीम आर्मी और आम आदमी के लोगों को हिंसा फैलाने के लिए बुलाया था। इन्ही सशस्त्र लोगों ने लाठी डंडों से ग्रामीणों पर हमला किया और आगजनी की। मिली जानकारी के अनुसार चर्च लीडर महेंद्र बघेल ने क्रिसमस से पहले हिंदू धर्म में वापसी की है। बताया जा रहा है कि उन्होंने कांकेर स्थित शीतला मंदिर में पहुंचकर सनातन धर्म अपनाया है। वहीं हिंदू धर्म में वापसी करने के बाद महेंद्र बघेल ने ईसाई धर्म पर आरोप लगाते हुए कहा कि बड़े तेवड़ा में शव दफनाने को लेकर ​जो विवाद हुआ था वह पूरी तरह सुनियोजित था। महेंद्र बघेल ने अराजकता फैलाने वाले करीब आधा दर्जन लोगों के नाम भी गिनाए। महेंद्र बघेल के इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि बस्तर में कन्वर्टेड लोगों की घर वापसी से दूसरा पक्ष बुरी तरह बौखला उठा है और बस्तर को हिंसा की आग में झोंकने तक पर आमादा हो गया है।
मसीही समाज ने सौंपा ज्ञापन
कांकेर जिले में शव को कब्र से निकालने के बाद विवाद और तेवड़ा गांव में लगातार तीन दिन से चल रहे विवाद व आगजनी से आदिवासी और मसीही समुदाय आमने-सामने आ गए हैं। हालात यहां तक बिगड़े कि आमाबेड़ा और बड़े तेवड़ा इलाके में बने 3 चर्च और प्रार्थना भवनों और मंदिर में में आगजनी, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ हुई। घटना को लेकर मसीहियों ने पुष्पेंद्र महंत के नेतृत्व में कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। मसीहजनों ने ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग करते हुए लिखा है कि भले ही संबंधित अनुयायी सरपंच द्वारा अपने पिताजी का क्रियाकर्म पैतृक रीति रिवाज अनुसार नहीं किया जा सका, जिस पर गांव के गणमान्य एवं वरिष्ठजनों एवं समुदाय के लोगों द्वारा परिस्थितियों को देखते हुए उचित एवं सम्यक परिस्थिति निर्मित करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से शव का क्रियाकर्म कराया जाना चाहिए था। किन्तु इसके विपरित गांव के ही लोगों द्वारा मसीही विरोधी मानसिकता व्यक्त करते हुए बिना किसी दोष एवं कारण के पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर गांव में स्थित चर्च गिरजा घरों में व्यापक तौर पर तोड़फोड़ कर आगजनी की गई। इस घटना से मसीही समाज दुखी एवं क्षुब्ध है। हम यह चाहते हैं कि घटना के संबंध में जिम्मेदार संगठन के लोगों एवं उपद्रवियों के खिलाफ तत्काल कार्यवाही की जाए।

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