रामलला की नगरी मे आयोजित 9वीं राष्ट्रीय एक्यूपंचर संगोष्ठी मे डॉ. वीएल सोनी का व्याख्यान

= बस्तर के एक्यूपंचर विशेषज्ञ डॉ. सोनी का राष्ट्रीय स्तर पर बजा डंका


जगदलपुर। श्री रामलला की नगरी अयोध्या में 13 और 14 दिसंबर को आयोजित 9वें राष्ट्रीय एक्यूपंचर अधिवेशन में जगदलपुर के एक्यूपंचर विशेषज्ञ डॉ.वीएल सोनी ने बस्तर के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ राज्य का नाम रोशन किया है।भारत भर से आए एक्यूपंचर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने डॉ. सोनी द्वारा किए जा रहे कार्य की प्रशंसा की और साथ ही किडनी की बीमारी के एक्यूपंक्चर से सफल इलाज करने पर डॉ सोनी को एक्यूपंचर विधि में एक नया आयाम स्थापित करने वाले विशेषज्ञ के रूप में विभूषित किया गया।
संगोष्ठी में डॉ. वीएल सोनी ने अपने व्याख्यान में बताया कि छत्तीसगढ़ में बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले के कोलर गांव की 28 वर्षी मुन्नी बघेल किडनी जैसे गंभीर बीमारी से ग्रस्त थी। कई बड़े चिकित्सा संस्थानों में इलाज कराने के बाद उन्हें डायलिसिस की सलाह दी गई थी और रायपुर रेफर किया गया था। आर्थिक दृष्टि से रायपुर जाने में असमर्थ होने के कारण उन्होंने एक्यूपंक्चर विधि से इलाज कराने हेतु मुन्नी बघेल बस्तर संभाग के एकमात्र एक्यूपंक्चर चिकित्सा डॉ. वीएल सोनी के पास इलाज के लिए पहुंची। जब वह जांच के लिए आई तब गंभीर तौर पर किडनी इन्फेक्शन से ग्रसित थी उनके ब्लड यूरिया 180 क्रिएटिनिन की मात्रा 7.9 पाई गई थी जबकि सामान्य व्यक्ति का ब्लड यूरिया 7 से 20 एमजी एवं क्रिएटिनिन 0.7 से 1.3 एमजी होना चाहिए। इस महिला का एक्यूपंक्चर विधि से 7 दिन तक लगातार उपचार करने के पश्चात यूरिया 180 से घटकर 24 एमजी तथा क्रिएटिन 7.89 से घट कर 1.34 एमजी आ चुका था इस प्रकार किडनी जैसी घातक बीमारी का इलाज एक्यूपंचर विधि से बहुत कम खर्चे में किया जा सकता है।
डॉ.सोनी ने एक्यूपंक्चर के बारे में बताते हुए कहा कि यह विधि लगभग 5000 वर्ष पुरानी है और इसमें बारीक सुईयों से शरीर के विभिन्न ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा प्रवाह कर इलाज किया जाता है इसका उद्देश्य शरीर में ऊर्जा प्रवाह को संतुलित करना और दर्द, तनाव पूर्ण दर्द, माइग्रेन, पाचन संबंधी बीमारी, नसों का दबाव, सहित अन्य कई बीमारियों का उपचार एक्यूपंचर पद्धति से संभव है।

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