संकोच की जंजीर तोड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी बस्तर की राजकुमारी कश्यप

= ‘बिहान’ मिशन ने बदल दी जिंदगी, बन गई सफल पशु पालक और उद्यमी
= घर की खेती के लिए खरीद लिया ट्रैक्टर भी

जगदलपुर। बस्तर जिले के लैंड्रा गांव की राजकुमारी कश्यप, जो कभी बेहद संकोची स्वभाव की थीं और घर से बाहर निकलने तक में संकोच महसूस करती थीं, आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। वर्ष 2008 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बने ‘सूरजमुखी महिला स्व सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद उनके जीवन में अद्भुत परिवर्तन आया है। बिहान मिशन ने राजकुमारी की जिंदगी की दिशा ही बदलकर रख दी है।
समूह ने न सिर्फ उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया, बल्कि उन्हें अपनी क्षमताओं को पहचानने का मंच भी दिया। इसी आत्मबल के सहारे उन्होंने धीरे-धीरे आजीविका संबंधी गतिविधियों में कदम रखा। धान और सब्जी की खेती से शुरुआत करने वाली राजकुमारी ने आगे बढ़कर मुर्गी और बकरी पालन को अपनाया और एक छोटे लेकिन मजबूत पशुपालन व्यवसाय की नींव रखी। आज वह ब्रीडिंग शेड तैयार कर आसपास के विकासखंडों में चूजों की आपूर्ति कर रही हैं, जो उनकी उद्यमशीलता और मेहनत का जीवंत प्रमाण है। परिवार का सहयोग भी उनकी सफलता में एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा। जहां उनके पति गणेश कश्यप राजमिस्त्री के रूप में काम करते हैं, वहीं उनके पुत्र एक सोसायटी का सफल संचालन कर रहे हैं। पिछले दो वर्षों में उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने अपने बच्चों को खेती किसानी में सहायता देने के लिए ट्रैक्टर तक खरीद लिया है। राजकुमारी कश्यप इस सफलता का पूरा श्रेय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के ‘बिहान’ कार्यक्रम को देती हैं। उनके अनुसार यह मिशन ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने का वास्तविक साधन है जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी है।राजकुमारी कश्यप की यह यात्रा साबित करती है कि आत्मविश्वास, अवसर और सतत प्रयास मिलकर गरीबी की बेड़ियों को तोड़ सकते हैं और आत्मनिर्भरता की राह प्रशस्त कर सकते हैं।

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