बस्तर संभाग में बंद का व्यापक असर

= जगदलपुर में स्वस्फूर्त बंद रहे व्यापारिक प्रतिष्ठान
= शराब और मांस मटन की दुकानों में बेधड़क चलता रहा कारोबार


-अर्जुन झा-
जगदलपुर। धर्मांतरण और बस्तर संभाग के कांकेर जिले में आदिवासियों पर हुए हमले के विरोध में सर्व समाज द्वारा आहूत बंद का पूरे बस्तर संभाग में व्यापक असर देखने को मिला है। एक हिंदूवादी संगठन के कुछ लोगों द्वारा दबंगई दिखाने का मामला जगदलपुर से सामने आया है। बाकी बंद शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा। लोगों ने स्वस्फूर्त अपने प्रतिष्ठान बंद रखे।
बस्तर के कांकेर जिले के बड़े तेवड़ा और आमाबेड़ा में धर्मांतरण और एक धर्मांतरित व्यक्ति के शव को दफनाने को लेकर विवाद की स्थिति निर्मित हुई थी। आदिवासी समुदाय और मसीही धर्म को मानने वाले लोग आमने सामने आ गए। दोनों पक्षों में संघर्ष हो गया। दो चर्च जला दिए गए, शीतला माता मंदिर में आगजनी की गई। आरोप है कि भीम आर्मी और आम आदमी पार्टी से जुड़े बाहरी लोगों को बुलवा कर आदिवासियों पर हमले करवाए गए। इसी घटना को लेकर सर्व समाज ने आज 24 दिसंबर को छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया है। बंद का बस्तर संभाग में व्यापक असर देखने को मिला। बंद से मेडिकल स्टोर्स और पेट्रोल डीजल पंपों को मुक्त रखा गया था, मगर जगदलपुर में शराब दुकानें और मांस मटन की दुकानें भी खुली रहीं। इसे लेकर लोगों की रोचक प्रतिक्रिया थी कि बंद के दौरान बक बक के बाद थकान उतारने शायद शराब मांस की उपलब्धता जरूरी थी। इसीलिए बंद कराने निकले किसी भी व्यक्ति ने इन दुकानों को बंद कराने का प्रयास नहीं किया। संजय बाजार में दूर दूर के गांवों से सब्जी बेचने आए लोगों भी पसरा नहीं लगा पाए। इन फुटकर व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। संभाग के सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव जिलों में भी ऐतिहासिक बंद की खबर है। सभी जिलों के गांवों में भी बंद का व्यापक असर दिखा। यात्री बस परिचालन, माल परिवहन भी बंद रहे।

विहिप नेता की दबंगई

जगदलपुर में विहिप और बजरंग दल ने बंद कराने में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया, सुबह से ही कार्यकर्ता हाथों में डंडे, झंडे लेकर लोगों को प्रतिष्ठान बंद करने दबाव बनाते रहे। अधिकांश व्यापारियों ने वक्त की नजाकत को समझते हुए खुद ही अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। आज पहली बार लोगों और सुबह सुबह अखबार हॉकर और पत्रकारों को विहिप के एक सनकी नेता के प्रकोप का सामना पड़ा। कुछ देर के लिए कोतवाली थाना के सामने स्थित चाय और दूध के ठेले पर अप्रिय स्थिति पैदा हो गई। अपने आपको भला मानुष समझने वाले पेशे से चार्टड एकाउंटेंट टाइप इस नेता ने निगम की नुक्कड़ दुकान पर दूध बेचने वाले हिंदू व्यापारी पर धौंस जमाते हुए कहा- तुम हिन्दू ही नहीं हो, तुम बेशर्म होकर दूध बेच रहे हो। वहां खड़े पत्रकारों ने उन्हें उनकी ही संस्था द्वारा बंद आयोजन में दूध और दवाई को लेकर छूट का हवाला दिया, तो ये नेता पत्रकारों पर ही बिफर पड़े और उन्हें भी गैर हिंदू बताते यहां तक कह दिया कि छत्तीसगढ़ पमें रहना है तो हिंदू बनकर रहना होगा। पत्रकारों और अन्य लोगों ने उन्हें अपने हिन्दू होने की बात कहते हुए उस नेता की फ्रेंच कट दाढ़ी पर सवाल उठाया और कहा कि आपकी पोशाक तो खुद स्वदेशी नहीं है। इस पर यह नेता और भी उत्तेजित हो उठे। उन्होंने अपने दल के लोगों को फोन कर कहा कि कुछ लोग बंद को असफल करना चाहते हैं जल्दी आ जाओ। हालांकि उन्हीं के दल के एक सज्जन ने समझा बुझा कर धकेलते हुए उक्त सनकी नेता को वहां से दूर किया।

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