इंसानों को उजाड़ कर बना रहे हैं चिड़ियाघर!

= बार बार बेदखली का दंश झेलते आ रहे हैं ग्रामीण

जगदलपुर। बस्तर के भानपुरी क्षेत्र के ग्राम खड़गा में 3-4 गांवों के ग्रामीण विस्थापन दर विस्थापन का दंश झेलते आ रहे हैं। पहले उन्हें कोसारटेड़ा बांध के नाम पर बेदखल किया गया, अब चिड़ियाघर बनाने के नाम पर बेदखल करने नोटिस थमा दिए गए हैं। बार बार की बेदखली से परेशान ग्रामीण धरना प्रदर्शन पर उतर आए हैं। उन्हें समर्थन देने आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नारायणपुर के पूर्व विधायक चंदन कश्यप भी धरना स्थल पर पहुंचे। दीपक बैज ने कहा कि सरकार और प्रशासन ग्रामीणों की समस्याएं सहानुभूति पूर्वक सुनें और सकारात्मक हल निकालें।
कोसारटेड़ा बांध निर्माण खड़गा समेत आधा दर्जन गांव डूबान क्षेत्र में आने के कारण बेदखल कर दिए गए थे। ऊनके मकान और कृषि भूमि सब कुछ ले लिए गए। विस्थापित ग्रामीणों ने आसपास के गांवों में शरण ली। वहां किसी तरह मकान बनाए और वन भूमि पर खेती किसानी शुरू की। बाद में उन्हें कांग्रेस सरकार के दौरान वन भूमि के पट्टे भी दिए गए थे। अब सरकार बिना ग्रामीणों की सहमति के उनकी पट्टे वाली जमीन पर चिड़ियाघर बनाने का प्रोजेक्ट ला रही है। इससे ग्रामीणों के सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा होने का खतरा पैदा हो गया है। ग्रामीण बेदखली की कोशिश से भयभीत हैं और विरोध पर उतर आए हैं। ग्रामीणों ने खड़गा में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि वे चिड़ियाघर निर्माण एवं पशु पक्षी संरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। चिड़ियाघर का निर्माण ऎसी जगह करना चाहिए जहां पर्याप्त खाली शासकीय भूमि हो। हमारे पास वन भूमि के पट्टे हैं, हम अवैध ढंग से बसे हुए लोग नहीं हैं। सरकार और प्रशासन हमारे साथ जुल्म न करें।

घुसपैठिये नहीं हैं ये, न हो जुल्म: बैज

जानकारी मिलने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नारायणपुर क्षेत्र के पूर्व विधायक चंदन कश्यप भी खड़गा गांव में धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों की मांग का समर्थन किया और कहा कि इंसाफ के लिए हर लड़ाई में पूरी कांग्रेस आपके साथ खड़ी है। प्रदेश के हर नागरिक को अन्याय से बचाना हमारा फर्ज है। इस दौरान मीडिया से चर्चा करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि इन निरीह ग्रामीणों को पहले कोसारटेड़ा बांध के नाम पर खेत, खलिहान, गांव, घर से बेदखल कर दिया गया, अब पट्टे वाली जमीन से बेदखल करने की तैयारी की जा रही है। जीवन की यह स्थिरता ग्रामीणों के लिए घातक साबित हो रही है, बार बार की बेदखली सरासर ज्यादती है। ऎसी ज्यादती किसी भी ग्रामीण के साथ नहीं होनी चाहिए। दीपक बैज ने कहा कि ये कोई घुसपैठिये नहीं हैं कि खदेड़ दिए जाएं, ये बस्तर के मूल निवासी हैं। यहां के जल, जंगल, जमीन पर इनका ही पहला हक है।. इन्हें इनके हक से वंचित करना उचित नहीं है।. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारी इन ग्रामीणों के पास आएं, उनकी बातें सुनें और सार्थक समाधान निकालें।

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