भाजपा नेता गांव-गांव में बिकवा रहे हैं शराब, पुलिस ने दे रखी है खुली छूट: हरीश कवासी

=अस्पतालों में नहीं मिलती मलेरिया की भी दवा=
= नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर भी बरसे हरीश कवासी =

सुकमा। कांग्रेस के सुकमा जिलाध्यक्ष हरीश कवासी ने भाजपा नेताओं पर गांव गांव में शराब बिकवाने, इस गोरख धंधे को पुलिस का संरक्षण प्राप्त होने के आरोप लगाए हैं। कवासी ने कहा है कि मलेरिया के मामले में अति संवेदनशील सुकमा जिले के सरकारी अस्पतालों में मलेरिया की दवा तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भी केंद्र सरकार और भाजपा को घेरा।
पत्रकारों से चर्चा करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरीश कवासी ने कहा कि सुकमा जिले को मलेरिया और डेंगू के मामले में बेहद संवेदनशील माना जाता है। मगर दुर्भाग्य की बात है कि जिले के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिलते मरीजों को देने के लिए दवा नहीं होती। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता जनता की भलाई नहीं चाहते वह सिर्फ अपनी जेब भरने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सुकमा जिले में भाजपा नेताओं के संरक्षण में गांव-गांव में शराब बिक्री कराई जा रही है। जिले को अपराध का गढ़ बनाया जा रहा है। पुलिस प्रशासन का इन भाजपा नेताओं और अपराधी तत्वों को संरक्षण प्राप्त है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष हरीश कवासी ने सोमवार को प्रेसवार्ता कर भाजपा पर महिला आरक्षण संबंधी नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भाजपा पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने साफ किया कि वो महिला आरक्षण के समर्थन में थी और है। कांग्रेस नेता हरीश कवासी ने कहा कि भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को संसद में जो 131वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया, वह महिला आरक्षण के लिए नहीं था, कांग्रेस ने याद दिलाया कि महिला आरक्षण बिल यानि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पर 128वां संविधान संशोधन संसद के दोनों सदनों से पास हो का चुका है, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद ये कानून भी बन चुका है। भाजपा का 131वां संशोधन विधेयक असल में परिसीमन से जुड़ा था, इसमें लोकसभा सीटें 850 करने का प्रस्ताव था 815 राज्यों में और 35 केंद्र शासित प्रदेशों में, भाजपा झूठ बोल रही है। श्री कवासी ने कहा कि महिला आरक्षण कानून तो 2023 में ही बन गया था। भाजपा 16 अप्रैल को महिला आरक्षण का मुखौटा लगाकर परिसीमन बिल पास कराना चाहती थी, वो 2011 की जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ाना चाहती है, जबकि 2026-27 की जनगणना शुरू हो चुकी है। जातिगत जनगणना की बात भी सरकार कर चुकी है। फिर नए आंकड़ों का इंतजार क्यों नहीं। श्री कवासी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार की नीयत साफ है तो 2023 के महिला आरक्षण कानून में संशोधन कर उसे तुरंत लागू क्यों नहीं करती मौजूदा कानून के हिसाब से महिला आरक्षण 2036 के बाद ही लागू होगा, क्योंकि वो परिसीमन के बाद ही प्रभावी होगा। कांग्रेस का कहना है कि परिसीमन का इंतजार किए बिना वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 फीसदी आरक्षण दिया जा सकता है। विपक्ष इसके लिए तैयार है।

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