= संध करमरी गांव में न बनवा कर पोटियावंड में बनवा दी गई सड़क

बकावंड। बस्तर जिले के बकावंड ब्लॉक अंतर्गत संध करमरी गांव में सीसी सड़क निर्माण को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। भूमिपूजन के बाद सड़क निर्माण कार्य नहीं होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सड़क स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधियों की कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गई और निर्माण कार्य को दूसरे गांव में स्थानांतरित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024 में बस्तर सांसद महेश कश्यप द्वारा संध करमरी गांव में 10-10 लाख की लागत वाली दो सीसी सड़कों का भूमिपूजन किया गया था। उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही गांव में सड़क निर्माण होगा और उनकी वर्षों पुरानी समस्या दूर होगी, लेकिन समय बीतने के बाद भी जब सड़क निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो ग्रामीणों ने जानकारी जुटाई। इस दौरान यह बात सामने आई कि सरपंच द्वारा निर्माण कार्य के लिए कमीशन की मांग की गई थी। कमीशन नहीं मिलने पर सड़क निर्माण को संशोधित कर दूसरी पंचायत में स्थानांतरित करा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से सड़क बनने का इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। आरोप है कि संध करमरी की स्वीकृत सड़क को पोटियावंड गांव में बनवा दिया गया, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और भी बढ़ गई है। गांव के लोगों ने इसे स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार का खुला उदाहरण बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। उनका कहना है सांसद श्री कश्यप ने साफ दिल से हमारी मांग पूरी की थी, लेकिन स्थानीय कर्ताधर्ताओं ने विकास कार्यों में भी स्वार्थ को बीच में ला दिया। इस तरह की कमीशनखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई और संध करमरी में स्वीकृत सड़क का निर्माण नहीं कराया गया, तो वे आने वाले चुनाव में लोकल जनप्रतिनिधियों को सबक सिखाने से पीछे नहीं हटेंगे। यह मामला न केवल विकास कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति को उजागर भी करता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या संध करमरी के ग्रामीणों को उनका हक मिल पाता है या नहीं। इस मामले में सांसद महेश कश्यप के प्रतिनिधि रोहन घोष ने स्पष्ट किया है कि उक्त स्थान से सड़क निर्माण को दूसरे स्थान पर कराने में स्थानीय जनप्रतिनिधि की आपसी मंशा थी। रोहन घोष के मुताबिक सांसद श्री कश्यप ने केवल अपने मद से उक्त कार्य की स्वीकृति दी थी।










Leave a Reply