गोदावरी पावर एंड इस्पात को आयरन ओर परियोजना के क्षेत्र विस्तार के लिए ग्राम कच्छी में पट्टा दिए जाने का पुरजोर विरोध

= ग्रामीणों ने कंपनी की वादाखिलाफी और पर्यावरण को संभावित नुकसान का दिया हवाला

-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग के कांकेर जिले की भानुप्रतापपुर तहसील में टोपो शीट क्रमांक 64 एच/2 64 एच 3 64डी/15 के रकबा 32-36 हेक्टर के लिए पर्यावरण मंजूरी का कच्छी समेत अन्य गांवों के ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध किया है।
ग्रामीणों ने कहा है कि कच्छी आरक्षित वन के मध्य प्रस्तावित खनन परियोजना पूर्णतः अनुसूचित है। क्षेत्र में निवासरत आदिवासी, वन्य जीवों, पशु पक्षियों के लिए खनन अत्यन्त हानिकारक साबित होगा। प्रस्तावित परियोजना का क्षेत्र भारतीय संविधान की पांचवी अनुसूची के अंतर्गत अधिसूचित क्षेत्र है तथा अधिसूचित क्षेत्र में स्थापित किया जाने वाले किसी संयत्र, खनन परियोजना को किसी निजी कम्पनी अथवा व्यक्ति को व्यवसाय के लिए भूमि दी जाने के पूर्व उस क्षेत्र के निवासियों के अभिमत के बिना दिया जाना निषिद्ध है। गुपचुप तरीके से किसी ग्राम पंचायत संस्था को प्रभावित कर पूर्व में किसी प्रकार अनापत्ति प्राप्त कर ली गई है, तो उसे अमान्य करते हुए वर्तमान में जनप्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय जनता द्वारा इस जनसुनवाई में की जा रही आपत्ति को ही प्रमुख अभिमत माना जाए। इस क्षेत्र में लगभग 65 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति एवं शेष अनुसूचित जाति, पिछड़ावर्ग एवं सामान्य श्रेणी के लोग निवासरत हैं। इन सभी का उद्देश्य इस क्षेत्र के जंगल एवं जमीन को सुरक्षित रखना है।ग्रामीणों ने कहा है कि मेसर्स गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड, रायपुर को उत्तर बस्तर कांकेर जिले के ग्राम आरी डोंगरी में 106.60 हेक्टेयर के आरक्षित वन क्षेत्र पर लौह अयस्क का खनि पट्टा केंद्रीय शासन के अनुमोदन से राज्य शासन द्वारा स्वीकृत किया गया है।

वादे से मुकरी कंपनी

पूर्व में उक्त कंपनी द्वारा प्रस्तुत किए गए पर्यावरण प्रस्ताव में दिया गया आसपास के क्षेत्र के बुनियादी सामुदायिक विकास का आश्वासन पूर्णतः झूठा साबित हुआ है। कंपनी द्वारा राज्य शासन एवं पर्यावरण विभाग को दिए गए लिखित आश्वासन का खुला उल्लंघन किया गया है। हजारों की संख्या में इमारती, फलदार वृक्ष एवं अन्य उपयोगी वृक्षों की कटाई की गई है तथा विकल्प में वृक्षारोपण की बाध्यता होने के बावजूद एक भी वृक्ष नहीं लगाया गया है। कंपनी द्वारा किए गए शर्तों के उल्लंघन के मामले में वन एवं पर्यावरण विभाग और खनिज विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। परियोजना स्थल से खनिज परिवहन के लिए बनाई गई सड़क के दोनों ओर वृक्षारोपण कर ग्रीन कारीडोर बनाने के निर्देशों का भी उल्लंघन किया गया है। बड़े बड़े हाइवा, डंपर चलने से पूरा क्षेत्र धूल, डस्ट से प्रदूषित हो गया है। सड़क पर कभी भी पानी का छिडकाव नहीं किया जाता है।

सामुदायिक विकास का वादा थोथा

ग्रामीणों ने कहा है कि कंपनी द्वारा परियोजना क्षेत्र के आसपास के ग्रामों में सामूदायिक विकास के कार्य कराने के लिखित आश्वासन के बावजूद कोई विकास कार्य नहीं किया गया। कंपनी द्वारा परियोजना क्षेत्र में मशीन से की जाने वाली ड्रीलिंग एवं हैवी ब्लास्टिंग की तेज ध्वनि से पूरा वातावरण अशांत हो गया है एवं पूरे क्षेत्र में हवा प्रदूषित हो जाती है। तेज ध्वनि से वन्य जीव स्थान छोड़कर अन्य क्षेत्र में निर्वासित जीवन जी रहे हैं। कंपनी द्वारा खनिज उत्खनन की आड़ में आरक्षित वन के वृक्षों की अवैध कटाई जारी है। उपरोक्त कारणों से कंपनी को लौह खनिज के लिए दी गई पर्यावरण मंजूरी एवं खनि प‌ट्टा तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। पर्यावरण प्रस्ताव के पूर्व ही उक्त क्षेत्र से कंपनी द्वारा लगभग 5 हजार वृक्षों की की अवैध कटाई की जा चुकी है, विकल्प में एक भी वृक्ष नहीं लगाया गया है।

झूठ का लिया सहारा

ग्रामीणों ने कहा है कि कंपनी द्वारा प्रस्तावित परियोजना सारणी में राजोबिदिह आरक्षित वन, खांडे सुरक्षित वन, नघु आरक्षित वन, पिचेकट्टा आरक्षित वन, मारडेल सुरक्षित वन, रनवाही सुरक्षित वन, उनोचपनी आरक्षित वन, मगरधा आरक्षित वन्, लिमोडीह सुरक्षित वन ये सभी आरक्षित वन प्रस्तावित परियोजना के चारों ओर से आच्छादित हैं और कच्छी वन आरक्षित क्षेत्र से जुड़े हैं। कम्पनी द्वारा प्रस्तावित परियोजना में जो दूरी बताई गई है, वह वास्तविक दूरी नहीं है। सभी आच्छादित्त वन की दूरी आरक्षित वन सीमा क्षेत्र से बहुत ही कम दूरी पर स्थित हैं। इस प्रकार कम्पनी द्वारा प्रस्तावित परियोजना में झूठा कथन का पर्यावरण विभाग को गुमराह किया है।

वन्य जीवों के अस्तित्व पर संकट

कंपनी द्वारा खनन की प्रक्रिया में मशीनों से ड्रीलिंग एवं ब्लास्टिंग करने का लेख किया है। मशीनों की ड्रीलिंग एवं हैवी ब्लास्टिंग से वन क्षेत्र में विवरित वन्य जीवों, पशु पक्षियों पर तेज आवाज से ध्वनि प्रदूषण ध्वनि प्रदूषण होगा। वन्य प्राणी एवं पशु पक्षी आतंकित होकर वन क्षेत्र छोडकर अन्यत्र भागेंगे जिससे सम्पूर्ण वन क्षेत्र में अशांत वातावरण व्याप्त होगा। हैवी ब्लास्टिंग एवं डस्ट से वन क्षेत्र के पेड़ एवं पौधों को भारी नुकसान होगा। परियोजना प्रस्ताव के अनुसार उपलब्ध खनिज की मात्रा 1145 मिलियन टन है जो सीमित मात्रा में केवल 8 वर्ष के लिए है खनिज का कोई बड़ा भंडार यहां नहीं है जिसके लिए चारों ओर से आच्छादित पूरे आरक्षित वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने की तैयारी कर ली गई है। खनन कार्य के लिए ड्रीलिंग एवं ब्लास्टिंग का उपयोग किये जाने से प्रदूषित वायु एवं हा तेज ध्वनि का संचार होगा जो इस शांतिप्रिय वन क्षेत्र के लिए नुकसानदेह है। परियोजना क्षेत्र आरक्षित वर्ग के मध्य है जिसके खनिज परिवहन के ट्रकों द्वारा आवागमन से पूरे वन क्षेत्र में ध्वनि का विस्तार होने से वन्य जीवों पर कुप्रभाव पड़ेगा। खुदाई से जमीन के निचले स्तर से पानी खदान आने से दूषित होगा जिसकी निकासी से जल स्तर पर विपरित प्रभाव पड़ेगा। खनिज उत्खनन से सतह से नीचे गहरा होने से खदान बंद होने पश्चात वन्य जीवों के लिए खतरनाक गड्‌डे साबित होंगे। वन्य जीवों की जान को खतरा बना रहेगा। परियोजना से केवल कंपनी को लाभ होगा। स्थानीय निवासियों को कंपनी रोजगार नहीं देती न ही आसपास पड़ोस के गांव में बुनियादी संरचना विकसित करने में कोई सहयोग करती है।

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