एसडीएम कोर्ट में लंबित प्रकरण की फाइल रिकॉर्ड रूम से गायब!

= फाइल न मिलने से फैसले पर असर की आशंका =
= बकावंड के धोबीगुड़ा के मामले से जुड़ी है फाइल =

-अर्जुन झा-
बकावंड। किसी अदालत में लंबित मामले की फाइल ही गायब हो जाए, तो मुकदमे का अंजाम क्या होगा? इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। ऐसा ही एक मामला एसडीएम न्यायालय से जुड़ा हुआ सामने आया है। मामले की फाइल रिकॉर्ड रूम से गायब हो गई है।फाइल अब ढूंढे नहीं मिल रही है और मुकदमे के फैसले पर असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।
रिकॉर्ड रूम से महत्वपूर्ण राजस्व प्रकरण की फाइल गायब होने से न केवल पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि लंबित मामलों के निर्णय पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्व प्रकरण क्रमांक 8 अ-6 सन 2006-07, जो नायब तहसीलदार बकावंड न्यायालय में लक्ष्मी नारायण पिता दामोदर के नाम से दर्ज था, उस पर सुनवाई के बाद निर्णय लक्ष्मीनारायण के पक्ष में दिया गया था। इस फैसले के खिलाफ सदाशिव पाढ़ी द्वारा बस्तर एसडीएम न्यायालय में अपील प्रस्तुत की गई थी, जहां यह मामला वर्तमान में लंबित है। बताया जा रहा है कि संबंधित प्रकरण की मूल फाइल एवं आवश्यक दस्तावेज अब रिकॉर्ड रूम से उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। आवेदक पक्ष द्वारा तहसीलदार बकावंड एवं एसडीएम बस्तर को इस संबंध में पत्राचार किया गया, लेकिन अधिकारियों द्वारा फाइल गुम होने की बात कही जा रही है। वहीं अधिकारी, कर्मचारी इस मामले में स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं।दस्तावेजों के अभाव में एसडीएम न्यायालय में चल रहे प्रकरण की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। आवेदक पक्ष को प्रकरण की नकल तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है, जिससे न्यायिक निर्णय में बाधा उत्पन्न होने की संभावना जताई जा रही है। इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या शासकीय रिकॉर्ड इस तरह गायब हो सकते हैं? क्या यह महज लापरवाही है या इसके पीछे कोई अन्य कारण? उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006-07 के दौरान एसडीएम कार्यालय में पदस्थ एक लिपिक वर्तमान में जिला रिकॉर्ड रूम में कार्यरत बताया जा रहा है, जिससे संदेह और गहराता है। फिलहाल, रिकॉर्ड नहीं मिलने से आवेदक के लिए यह एक बड़ी समस्या बन गई है और न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। ऐसे में आवश्यक है कि प्रशासन इस मामले की गंभीरता से जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो ।

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