मोदी की मंशा और साय के सुशासन पर पानी फेर रहे हैं बकावंड के अधिकारी

= हजम कर गए पीएम आवास और मजदूरी राशि
= आज तक अधूरा पड़ा है फूलमती का आवास

बकावंड। विकासखंड बकावंड में सुशासन में अधिकारी बिल्कुल नहीं दिख रहा है। अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि साय के सुशासन को दागदार करने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं। गरीबों के पसीने की कमाई को भी हजम करने में अधिकारी कर्मचारी गुरेज नहीं कर रहे हैं। पीएम आवास योजना में भी गफलत कर किया जा रहा है। गरीबों का आवास बने या नहीं उनकी तिजोरी भरती रहनी चाहिए।
बकावंड ब्लाक की ग्राम पंचायत टलनार में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास की पूरी राशि हितग्राही को नहीं मिल पाई है। वहीं आवास निर्माण में मनरेगा राशि हितग्राही को भुगतान न कर ऐसे व्यक्ति के नाम मस्टर रोल में नाम डाल दिया गया, जिसनर रत्ती भर भी काम नहीं किया है। बिना काम किए ही दूसरे व्यक्ति को भुगतान करना दर्शा दिया गया। जबकि आवास निर्माण में कई दिनों तक पसीना बहा चुकी महिला हितग्राही को फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। सरपंच सचिव की मनमानी और भ्रष्टाचार के चलते हितग्राही को उसकी पारिश्रमिक राशि और आवास की बची किश्त भी नहीं मिल पाई है। नतीजतन हितग्राही का आवास आज तक अधूरा पडा है। हितग्राही फूलमती ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब तक उसे सिर्फ 95 हजार रुपए ही मिल पाए हैं। मजदूरी राशि भी फूलमती को नहीं दी गई है। परेशान फूलमती के शिकायत करने के वाबजूद सरपचं सचिव चुप बैठे हैं। गांव में चर्चा है कि आवास की बाकी राशि सरपंच, सचिव और जनपद पंचायत बकावंड के कर्मियों ने हजम कर ली है। ऐसे में गरीबों को पक्का घर उपलब्ध कराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन की परिकल्पना भला कैसे फलीभूत होगी?

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