बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में ध्यान केंद्रित करेगी इग्नू

= इग्नू के प्रति घटते रुझान से क्षेत्रीय निदेशक चिंतित

जगदलपुर। बस्तर जैसे आदिवासी और दूरस्थ अंचल में उन लोगों के लिए शिक्षा की नई संभावनाएं खुल रही हैं, जो समय पर नियमित पढ़ाई नहीं कर पाए हैं। बस्तर पर इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी का विशेष ध्यान है। हम चाहते हैं कि बस्तर में भी शिक्षा का स्तर बेहतर हो। हम वर्तमान में इग्नू के माध्यम से कुल 333 पाठ्यक्रम संचालित हैं। इनमें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर, पीजी डिप्लोमा सहित ऑनलाइन और ऑफलाइन कोर्सेस शामिल हैं। पारंपरिक विषयों के साथ-साथ रोजगारोन्मुख आधुनिक पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं।
यह बातें बस्तर प्रवास पर पहुंचे इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. राजेंद्र गौड़ा ने आज पत्रकार वार्ता में कहीं। उन्होंने कहा कि बस्तर और सरगुजा से इग्नू में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या नगण्य है। इसे ध्यान में रखते इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय की ओर से बस्तर और सरगुजा संभाग में डिस्टेंस एजुकेशन को बढ़ावा देने शासन की मंशा के अनुरूप अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान डॉ. राजेंद्र ने बताया कि देशभर में लगभग 33 लाख विद्यार्थी इग्नू के जरिए अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन बस्तर में अभी इग्नू के प्रति अपेक्षित जागरूकता नहीं है। यहां विशेष प्रयास की आवश्यकता है। इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी के महत्व पर प्रकाश डालते उन्होंने बताया कि इग्नू को नेक से ए++ ग्रेड और एनआईआरएफ में शीर्ष रैंकिंग प्राप्त है तथा इसकी अध्ययन सामग्री की गुणवत्ता उच्च स्तर की मानी जाती है। डॉ गौडा के मुताबिक इग्नू की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि छात्र किसी भी नियमित महाविद्यालय में अध्ययनरत रहते ही इग्नू से दूसरी डिग्री भी प्राप्त कर सकते हैं। पीजी डीसीजे, साइबर लॉ और मास कम्युनिकेशन जैसे पाठ्यक्रम युवाओं के लिए विशेष उपयोगी हैं। इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कोई आयु सीमा नहीं है, जिससे किसी भी उम्र के लोग शिक्षा से जुड़ सकते हैं। इग्नू में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री घर तक उपलब्ध कराई जाती है और केवल परीक्षा के समय केंद्र में उपस्थित होना होता है। जगदलपुर केंद्र के प्रभारी डॉ तुनीर खेलकर ने बताया कि इग्नू में एससी-एसटी वर्ग के ऐसे विद्यार्थी जिनकी वार्षिक आय ढाई लाख रुपये से कम है, उन्हें बीए, बीएससी और बीकॉम पाठ्यक्रमों में प्रवेश पर 50 प्रतिशत शुल्क में छूट दी जा रही है। वहीं जेल में बंद कैदियों के लिए इग्नू द्वारा निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था की गई है, जिसमें परीक्षा केंद्र भी जेल परिसर के भीतर होता है।

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