= भ्रष्टाचार के खेल मे बच्चों की जिंदगी लगी दांव पर =

-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर संभाग में शाला भवन निर्माण में भ्रष्टाचार और भुगतान के लिए अनुचित दबाव से परेशान एक प्रधान पाठक की खुदकुशी का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ है कि एक और शाला भवन के निर्माण में गंभीर भ्रष्टाचार का मामला सामने आ गया है। भ्रष्टाचार भी ऐसा कि जिसने दर्जनों विद्यार्थियों की जान को दांव पर लगा दिया है। महज 50 सेंटी मीटर गहरी नींव पर खड़ा किया जा रहा स्कूल भवन भविष्य में देश के भविष्य यानि विद्यार्थियों की कब्रगाह बन सकता है।
शाला भवन निर्माण में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का यह मामला भी बस्तर संभाग के बीजापुर जिले से ही सामने आया है।बीजापुर के विकासखंड भैरमगढ़ के चिनगेर गांव में बन रहे स्कूल भवन के निर्माण में बड़ी मिलीभगत और घटिया कारीगरी सामने आई है। पूरे मामले की नींव मात्र 50 सेंटीमीटर की गहराई पर रखी गई है, जो भ्रष्टाचार और अधिकारियों और ठेकेदार के गठजोड़ की साफ तस्वीर पेश कर रही है।शिकायत के अनुसार, मानक स्तर से कम खुदाई कर कॉलम खड़ा किए गए हैं। फिर भी उन्हीं कॉलमों पर जुड़ाई का काम शुरू कर दिया गया है। इतनी उथली नींव पर बना भवन किसी भी समय धराशायी हो सकता है, जिससे बच्चों और स्टाफ की जान जोखिम में पड़ जाएगी। इस संबंध में एसडीएम भैरमगढ़ ने कहा कि जांच कर प्रतिवेदन भेज दिया गया है। लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि इंजीनियर और अधिकारियों की सांठ-गांठ के चलते ढुलमुल जांच की जा रही है। उद्देश्य साफ है ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए पहले से बनाए गए 50 सेंटीमीटर के कॉलम पर ही जुड़ाई कर भ्रष्टाचार की नींव मजबूत की जा रही है।सवाल उठ रहा है कि आखिर इस मिलीभगत और घटिया निर्माण को किसका संरक्षण प्राप्त है? ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले ही रोका जा सके। उल्लेखनीय है किऐसे ही भ्रष्टाचार और अनुचित दबाव से परेशान बीजापुर जिले की प्राथमिक शाला मांझीपारा पालनार के प्रधान अध्यापक राजू पुजारी ने फांसी लगाकर कर आत्महत्या कर ली थी। पालनार में प्राथमिक शाला भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। भवन निर्माण की राशि शाला प्रबंधन समिति के खाते से भुगतान करना था। बताया गया है कि प्रधान पाठक राजू पुजारी पर निर्माण कार्य के ठेकेदार देवाशीष मंडल, इंजीनियर शैलेष वासम व समग्र शिक्षा के एक एपीसी छबितेश डोगंरे द्वारा भुगतान करने दबाव बनाया जा रहा था। बगैर पूरा काम हुए राशि निकालने से राजू पुजारी ने मना कर दिया। इसके बाद उक्त तीनों लोगों ने श्री पुजारी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। मानसिक दबाव न झेल पाने के कारण प्रधान पाठक राजू पुजारी ने अपने घर से दो किमी दूर जंगल में जाकर फांसी लगा ली।
राजू पुजारी की मौत की खबर मिलते ही परिजन, तेलगा समाज और आदिवासी समाज के सैकड़ों महिला, पुरुष जिला अस्पताल पहुंच गए। इन लोगों ने श्री पुजारी की मौत के जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग करते हुए लगभग तीन घंटे तक जिला अस्पताल के सामने धरना प्रदर्शन किया।
एसडीएम व थाना प्रभारी के लगातार समझाने के बाद भी परिजनों व समाज के लोगों ने भारी आक्रोश देखा गया। विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि एक ईमानदार शिक्षक की आत्महत्या से साफ जाहिर होता है कि ठेकेदार, इंजीनियर और एपीसी ने उन्हें किस कदर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया होगा। विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि इस मामले में पुलिस निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे। पुलिसने मृतक राजू पुजारी की जेब से पुलिस ने सुसाइड नोट बरामद किया है। सुसाइड नोट में मृतक राजू पुजारी ने मानसिक रूप से प्रताड़ना की बात कही है और प्रताड़ित करने वालों के नाम भी लिखे हैं। उन्होंने अपनी आत्महत्या के लिए ठेकेदार देवाशीष मंडल, इंजीनियर शैलेष वासम और एपीसी छबितेश डोंगरे को जिम्मेदार बताया है।











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