=बस्तर की अस्मिता और स्वाभिमान के प्रतीक थे बली दादा: कांता राठी
= बस्तर को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई थी स्व कश्यप ने =
नपा की पार्षद ने प्रतिमा स्थापित करने अध्यक्ष, सीएमओं को लिखा पत्र
सुकमा। नगर में पूर्व बस्तर सांसद बस्तर माटी पुत्र स्वर्गीय बलिराम कश्यप की स्मृति मे उनकी प्रतिमा स्थापना को लेकर पार्षद कांता राठी ने सामान्य सभा की बैठक व उससे पूर्व अध्यक्ष तथा सीएमओ को ज्ञापन की देकर इस पर त्वरित पहल करने का आग्रह किया है।
सुकमा नगर पालिका में दादा स्व. बलीराम कश्यप की प्रतिमा लगाये जाने को लेकर वार्ड क्रं. 13 की पार्षद कांता राठी ने नगर पालिका अध्यक्ष हुंगाराम मरकाम व सीएमओ हुंगाराम गोंदे को ज्ञापन सौंप कर इस दिशा में तत्काल कार्यवाही करने का आग्रह किया है। इस मामले को लेकर सामान्य सभा की बैठक में भी प्रस्ताव लाया गया। पार्षद कांता राठी ने सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि सुकमा नगर एवं सम्पूर्ण बस्तर अंचल के विकास, सामाजिक समरसता एवं जनसेवा के प्रतीक रहे पूर्व सांसद स्वर्गीय बलिराम कश्यप की स्मृति में सुकमा नगर के किसी प्रमुख स्थल चौक पर उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करना अत्यंत आवश्यक एवं जनभावनाओं के अनुरूप है। स्वर्गीय बलीराम कश्यप जी बस्तर की माटी से जुड़े ऐसे जननेता थे जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन आदिवासी समाज, ग्रामीण
उत्थान और क्षेत्रीय विकास के लिए समर्पित कर दिया था।
राष्ट्रीय स्तर पर दिलाई पहचान
श्रीमती राठी ने बताया कि दादा बलीराम कश्यप बस्तर क्षेत्र से कई बार सांसद निर्वाचित हुए तथा संसद भवन में बस्तर की समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। सरल स्वभाव, निष्कलंक छवि और समर्पित नेतृत्व के कारण वे जन-जन के हृदय में आज भी आदरपूर्वक स्मरण किए जाते हैं। उन्होंने सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल एवं संचार सुविधाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेषकर वनांचल दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा पहुंचाने हेतु उनके प्रयास सराहनीय रहे। बस्तर के आदिवासी समुदाय को राजनीतिक मुख्यधारा से जोड़ने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है। वे केवल एक जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि बस्तर की अस्मिता और स्वाभिमान के प्रतीक थे। युवाओं को मिलेगी प्रेरणा श्रीमती राठी ने कहा कि आज जब सुकमा सहित पूरा बस्तर विकास की नई दिशा में अग्रसर है, ऐसे में स्वर्गीय बलिराम कश्यप जी की प्रतिमा स्थापना से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी तथा क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास से नई पीढ़ी परिचित होगी। यह कार्य न केवल एक महान जननायक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी, बल्कि सामाजिक एकता और सकारात्मक सोच को भी सुदृढ़ करेगा।











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