सरकार बदली और ग्रामीण औद्योगिक पार्क योजना पर लग गया ग्रहण

= करोड़ों की लागत से तैयार स्ट्रक्चर हो रहे हैं कबाड़
= महिला सशक्तिकरण की मंशा पर फिर गया पानी

-अर्जुन झा-

बकावंड। पूर्ववर्ती सरकार द्वारा ग्रामीणों और महिलाओं के आर्थिक उत्थान एवं सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगिक पार्क योजना भाजपा की सरकार आने के बाद धराशायी हो गई है। योजना के नाम पर खर्च किए गए करोड़ों रुपए व्यर्थ चले गए हैं। औद्योगिक पार्को के लिए तैयार किए गए स्ट्रक्चर्स झाड़ियों तले दबकर जर्जर होते जा रहे हैं। महिला सशक्तिकरण की मंशा पर पानी फिर गया है।


पूर्व की कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई महात्मा गांधी औद्योगिक पार्क योजना का अब क्या हश्र हो रहा है, तो इसकी बानगी देखने आपको बकावंड विकासखंड आना पड़ेगा। बकावंड के कोसमी में औद्योगिक पार्क की बदहाल स्थिति इस तस्वीर में साफ देखी जा सकती है। सरकार बदलते ही ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं का क्या हश्र होता है उसकी दशा को देखा जा सकता है। भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल के दौरान ग्राम कोसमी के विशाल भूभाग पर महात्मा गांधी औद्योगिक पार्क की स्थापना की गई थी। इस पार्क में निर्माण एवं प्रोसेसिंग यूनिट, सामुदायिक बकरी पालन शेड, भंडारण एवं पैकेजिंग यूनिट, शौचालय एवं विश्राम स्थल जैसे कई स्ट्रक्चर करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किए गए हैं। यह पार्क चल नहीं पाया और आज पूरे औद्योगिक पार्क में घास फूस, झाड़ झंखाड़ उग आए हैं। सभी यूनिटों में ताले लटक रहे हैं। कैंपस में मरघट जैसी वीरानी छाई हुई है।करोड़ो की लागत से ग्रामीणों को स्वरोजगार देकर स्वालंबन करने वाली योजना की बड़ी दुर्गति यहां हो रही है। सरकार भले ही बदले किंतु ग्रामीण विकास को लेकर हर सरकार को हमेशा सजग रहना ही चाहिए। कोसमी के ग्रामीण पूछ रहे हैं कि इस औद्योगिक पार्क में कभी रौनक लौट पाएगी भी या नहीं?

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