एग्रीस्टेक ने उलझाया किसानों को

= एग्रीस्टेक में नहीं दिख रहा है रकबा और खसरा, धान बेचने में परेशानी

-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर में धान की कटाई के बाद किसान अब मिंजाई और बिक्री में जुट गए हैं। मौसम खुलने से किसानों को बड़ी राहत मिली है, और वे अब अपने धान की आसानी से कटाई और मिंजाई कर पा रहे हैं। खरीदी केंद्रों में चहल पहल काफी बढ़ गई है।मगर कई किसान एग्रीस्टेक के उलझन में फंस गए हैं। एग्रीस्टेक में रकबा और खसरा न मिलने के कारण किसानों को टोकन नहीं मिल रहा है और वे अपना धान नहीं बेच पा रहे हैं।
किसान अब आधुनिक मशीनों का उपयोग करके धान की कटाई और मिंजाई कर रहे हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बच रहा है। इसके अलावा, ऑनलाइन टोकन सुविधा के माध्यम से किसान घर बैठे टोकन कटा कर धान की बिक्री कर रहे हैं, जिससे उन्हें लैम्पस में जाने की जरूरत नहीं है। सरकार ने यह सुविधा शुरू करने के लिए “टोकन तुंहर हाथ” एप बनाया है, जिससे किसान घर बैठे टोकन कटा सकते हैं, और किसान की पूर्ण जानकारी एप में देख सकते हैं। किसान सोमारू कश्यप ने बताया कि आनलाईन से सुविधाएं तो मिल रही हैं, लेकिन एग्रीस्टेक में खसरा और रकबा नहीं दिखाने से धान बेचने में परेशानी हो रही हैं। उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया है कि किसानों की सुविधा के लिए संसोधन किया जाए और धान टोकन जारी किया जाए। सोमारु कश्यप ने बताया कि एग्रीस्टेक में मेरा खसरा और रकबा नहीं दिखाने से धान बेचने के लिए टोकन नहीं कट रहा है। उन्होंने कहा कि आनलाईन टोकन सुविधा से किसानों को बहुत लाभ हो रहा है, लेकिन एग्रीस्टेक में खसरा और रकबा नहीं दिखाने से परेशानी हो रही है।

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