इतना मुस्तैद है बस्तर में प्रशासन!

=छुट्टी के दिन जारी कर दिया स्थगन आदेश, सक्रियता पर सवाल

-अर्जुन झा-
जगदलपुर। पीड़ित ग्रामीण अपनी समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते काटते बुढ़ा जाते हैं, फिर भी उन्हें समय पर इंसाफ नहीं मिल पाता। वहीं बस्तर के फ्रेजरपुर के एक जमीन विवाद के मामले तहसीलदार द्वारा दिखाई गई गजब की और संदिग्ध सक्रियता ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। आज 1 मार्च को रविवार अवकाश के बावजूद तहसीलदार ने जमीन संबंधी मामले में जो सक्रियता दिखाई है, वह चर्चा का विषय बन गई है। मामला जगदलपुर तहसील अंतर्गत राजस्व निरीक्षक मंडल फ्रेजरपुर के पटवारी हल्का नंबर 09 के खसरा नंबर 1 के विभिन्न भूखंडों को लेकर विवाद से जुड़ा हुआ है। तहसीलदार द्वारा वर्धमान कॉलोनी जगदलपुर निवासी अनावेदक उमाशंकर शुक्ला और मुरली नायडू के खिलाफ जारी स्थगन आदेश में कहा गया है कि उक्त भूखंड राजस्व अभिलेख में शिव मंदिर वार्ड निवासी अमित कुमार दास एवं अन्य छह लोगों के नाम पर दर्ज हैं। इन भूखंडों पर आवेदकों ने बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया था, जिसे आज 1 मार्च 2026 को आनवेदकों द्वारा जेसीबी से तोड़ कर भूखंडों पर कब्जा किया जा रहा है। आवेदक ने उक्त प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए आवेदन किया है। आवेदन पर विचारण उपरांत प्रतिक्रिया और निर्माण पर आगामी आदेश तक तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाती है। अगर आपके पास उक्त जमीन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज हैं, तो आगामी 5 मार्च को स्वयं अथवा अपने वकील के माध्यम से तहसील न्यायालय में प्रस्तुत कर सकते हैं। इस तरह के विवाद तो सामान्य बात हैं, मगर इस मामले में बड़ी बात यह है कि कथित अनावेदकों ने आज 1 मार्च को कब्जे की कोशिश की, 1 मार्च को रविवार छुट्टी के आवेदक ने तहसील न्यायालय में आवेदन किया और तहसीलदार ने कार्यालय खोल कर स्थगन आदेश भी जारी कर दिया। रविवार के साप्ताहिक अवकाश के दिन दिखाई गई इस प्रशासनिक तत्परता ने नई बहस को जन्म दे दिया है। सूत्र बताते हैं कि जमीन दलाल और भू माफिया का गिरोह अपनी व्यक्तिगत धौंस जमा कर राजस्व विभाग के अधिकारियों से कभी भी कोई भी आदेश निकलवा लेते हैं, जबकि साधारण लोगों को अपने हक के लिए महीनों चक्कर लगाने पड़ते हैं।

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