सौ बिस्तर अस्पताल के नाम पर ये कैसा मजाक!

= न डॉक्टर, न स्टॉफ, स्कूल में चल रहा है हॉस्पीटल =


दल्ली राजहरा। शहर और अंचल के लोगों के साथ इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है कि कहने को तो यहां सौ बिस्तर अस्पताल शुरू कर दिया गया है, मगर डॉक्टर्स और स्टॉफ की तैनाती नहीं की गई है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात तो यह है कि यह 100 बिस्तरों वाला हॉस्पीटल एक स्कूल भवन में संचालित हो रहा है।
खनिज नगरी दल्ली राजहरा में सौ बिस्तर अस्पताल की सुविधा शुरू करने के नाम पर शासन द्वारा नगर और अंचल के लोगों के साथ बड़ा मजाक किया जा रहा है। कोंडेकसा पावर हाउस के पास स्थित एक स्कूल में चल रहे कथित सौ बिस्तर अस्पताल में एकमात्र डॉक्टर है वह भी रिटायर हो चुके हैं ।ये डॉक्टर फिलहाल संविदा नियुक्ति पर काम कर रहे हैं। अस्पताल स्टाफ के नाम पर महज तीन फीमेल नर्स, एक मेल नर्स और दो महिला स्वीपर डेलीवेज में रखे गए हैं। जब राजहरा व्यापारी संघ के पदाधिकारी एवं नगर के पत्रकार अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे तो अस्पताल की स्थिति काफी दयनीय दिखाई दी। दिनभर में 40 से 50 ओपीडी मरीज आते हैं। वह भी आसपास के मोहल्ले के, यहां सिर्फ शुगर, ब्लड प्रेशर आदि का इलाज होता है। कुछ विटामिन की दवाइयां दी जाती है अस्पताल में कुछ बिस्तर तो हैं लेकिन एक भी मरीज भर्ती दिखाई नहीं दे रहा है। जानकारी मिली है कि इस 100 बिस्तर अस्पताल के लिए 30 डॉक्टरों की नियुक्ति है परंतु अभी एकमात्र संविदा डॉक्टर इस अस्पताल को चला रहे हैं ।शहर से दूर होने की वजह से नगर क्षेत्र के लोग वहां जाने से परहेज कर रहे हैं आने जाने का कोई साधन भी नहीं है, क्योंकि किसी प्रकार की सुविधा वहां दिखाई नहीं दी यदि एकमात्र डॉक्टर छुट्टी में चले जाए तो यह अस्पताल बंद होने की स्थिति में रहता है ।अभी महावीर जयंती के दिन अस्पताल पूरा का पूरा बंद था सारे स्टाफ छुट्टी में थे। शासन की ओर से अस्पताल के लिए फंड दिया गया है लेकिन फंड का क्या उपयोग हो रहा है या किसी को समझ नहीं आ रहा है अस्पताल में दवाइयां या तो डौंडी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से आती है या कुछ चिखलाकसा अस्पताल से। स्टोर रूम में देखा गया तो अनेक दवाइयां नीयर एक्सपायरी पाई गईं।वर्तमान में जो स्टाफ इस अस्पताल में काम कर रहा है वह भी यहां की व्यवस्था से खुश नहीं हैं।उनका कहना है कि यहां डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, पर्याप्त इंस्ट्रूमेंट की व्यवस्था होनी चाहिए, कैजुअल्टी रूम भी होना चाहिए लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि इस अस्पताल के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं लेकिन खर्च किए गए रुपए से तो एक भवन का निर्माण हो सकता है लेकिन यह पैसा कहां गया यह किसी को नहीं मालूम कभी कोई एमबीबीएस डॉक्टर आता है तो वह एक-दो महीने बाद काम करने के उपरांत पीजी कोर्स करने के लिए चला जाता है। लगता है कि वह डॉक्टर यहां से प्रशिक्षण लेने के लिए आते हैं। जिला प्रशासन का ध्यान भी इस ओर पर्याप्त रूप से नहीं जा रहा है। ओपीडी के समय के बारे में पता चला कि अस्पताल खुलने का समय सुबह 8 से रात 8 बजे तक है लेकिन जानकारी मिली कि 5 बजे शाम के बाद अस्पताल बंद हो जाता है।
आकस्मिक सेवा का तो यहां नितांत अभाव है । नाइट शिफ्ट तो रहती ही नहीं तो फिर मरीज यहां आकर क्या करेगा? इधर व्यापारी संघ ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि राजहरा माइंस का मेल वार्ड जो बरसों से खाली पड़ा हुआ है उसे राज्य शासन अधिकृत कर वहां 100 बिस्तर अस्पताल संचालित करे। लेकिन इस ओर शासन एवं जिला प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है।

जनप्रतिनिधि खामोश क्यों?

अस्पताल में इतनी कमियां होने के बावजूद क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी पूरी तरह उदासीन और खामोश बैठे हुए हैं। क्षेत्रीय विधायक का ध्यान भी इस ओर नहीं जा रहा है और न ही क्षेत्रीय सांसद इस ओर ध्यान दे रहे हैं। इस 100 बिस्तर अस्पताल में एंबुलेंस भी नहीं है। देखा गया कि पैथोलॉजी विभाग में जांच की कोई मशीन नहीं है।
एसडीएम श्री साहू से चर्चा करने पर उन्होंने कहा कि यह सारी जानकारी जिला कलेक्टर को दी जाएगी तथा अस्पताल के सेटअप के बारे में बताया जाएगा। कलेक्टर के माध्यम से अस्पताल में व्याप्त कमियों को दूर किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *